Wednesday, May 26, 2021

जीवन-रेखा भाग 1

पात्र 

जीवन : नायक 

रेखा : नायका 

बैदेही : जीवन की ताई 

निराली देवी : रेखा  की माँ 

शेष पात्र आते जाते रहेंगे। 

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दोपहर का समय है। एक रेस्त्रां में प्रेमी युगल बैठकर बात कर रहे है। 

"क्या तुम मुझे सच में इतना प्यार करते हो जीवन " गिरते हुए आंसुओं के साथ रेखा ने जीवन के हाथ को अपने हाथ में ले लिया पर अगले ही पल नजर बचाते हुए हाथ छोड़ कर खिड़की से बाहर की ओर  देखना शुरू कर दिया |इन कुछ पल मे रेखा के चेहरे पर कई रंग  आये और चले गए  | 
" क्या हुआ, तुम्हे मेरे प्यार पर भरोसा नहीं है" जीवन ने गहरी निगाह के साथ रेखा के चेहरे से दिल को पढ़ने की नाकाम कोशिश की |
रेखा अब भी खिड़की के पार  ही देख रही थी | अब भी उसकी जुबान चुप थी पर आंसू बहुत से गम लिए गालों पर ढलकते हुए बहे जा रहे थे | पर जीवन भी क्या करता वो  रेखा के हालात से बिलकुल अनजान बहुत दूर से मिलने आया था | रेखा की निगाहों को देखने के लिए जीवन अपनी कुर्सी खिसका कर और करीब आया और रेखा के कंधे पर हाथ रखते हुए सवालिया निगाहों से रेखा की आँखे झाँकने की कोशिश की | पर अब जबकि रेखा बहुत असहज हो चुकी थी उसका गुबार उसे बेचैन कर रहा था और वो जीवन के कंधे पर सर रख कर बहुत रोना चाहती थी पर ... इस रेस्त्रां का लिहाज करना पड़ा और एक बार गौर से जीवन के चेहरे पर नजर डाली जैसे की वो उसे आखरी बार देख रही हो और तेजी से दरवाजे की तरफ बढ़ गई, पीछे पीछे जीवन ने रेखा-रेखा नाम की कई आवाज दी पर वह नहीं रुकी और  सीधे रिक्शा में बैठ गई, रिक्शे वाले को चलने का इशारा किया |

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रेखा और जीवन की मुलाकात कोई ज्यादा पुरानी नहीं थी पर दोनों जब बातें करते थे तो कोई ये नहीं बता सकता था कि वो अभी एक महीने पहले ही मिले होंगे |
हुआ कुछ यूँ कि कोई चार हफ्ते पहले सीढ़ियों पर फिसलने से रेखा की एड़ी का फैक्चर हो गया और हालत इतनी ख़राब हुई की रेखा हॉस्पिटल पहुँच गई|
रेखा का उसकी माँ के सिवा कोई नहीं था, तो दोनों माँ बेटी हस्पताल के जनरल वार्ड में पहुँच गए | आज पहले ही दिन मुरझाई हुई रेखा को हस्पताल का बिस्तर काँटों की चादर नजर आ रहा था और वह आँखे बंद किये माँ का इन्तजार कर रही थी हस्पताल में आने जाने वालों की पैरों की आवाज नींद के पहलू में जाने रोक रही थी कि तभी लगा जैसे कोई उसके बैड के पाइप  को पकडे है , रेखा ने झट से बिना करवट लिए देखने की कोशिश की और देखा तो  चेक की  शर्ट पहने एक 17 -18  साल का लड़का खड़ा है | अभी वह उसका चेहरा नहीं देख सकी थी | तब तक माँ आ गई जो जरूरत का समान लाने घर गई थी ये देख कर रेखा ने आँखों पर से हाथ हटा लिया और पूछा "  क्या हुआ माँ बड़ी थकी लग रही हो "
माँ ने हाँफते हुए कहा, "  अरे नहीं बस रस्ते में भीड़ बहुत थी "
"तूने अभी तक ये बिस्किट खाये नहीं " पैकिट दिखाते हुए रेखा को नाराजगी से माँ ने  देखा ,
ये कह कर टिफिन से आलू के पराठे निकाले और रेखा की ओर प्लेट रख दी |
"क्या माँ तुम तो जरा जरा सी बात पर" रेखा ने कहा.
"ये जरा सी बात है शाम के पांच बज गए और अभी तक तूने कुछ भी नहीं खाया " माँ ने पानी की बोतल खोली और गिलास में पानी निकाल कर पीने लगी |
"क्या करूं तुम्हारे इन्तजार में पता ही नहीं चला पांच बज गए " माँ को मनाने के अंदाज में रेखा ने कहा,
" चल ठीक है अब तो खा ले " मा ने फिर प्लेट को आगे बढा कर रख दिया
रेखा ने प्लेट से एक कौर उठाया और माँ को देते हुए कहा " लो तुम भी तो खाओ अभी हफ्ते भर सेवा करनी है "
ये सुन कर माँ का गुस्सा फुर्र हो गया और मुस्कुराने लगी |

रात के ग्यारह बज गए थे और रेखा की आँखों में अभी भी नींद नहीं थी, और माँ बेंच पर लेट कर आँखे बंद किये थी शायद सो भी गई हो .
तभी नजर घुमा कर वार्ड के और बेड देखे , सब के सब भरे हुए थे और  तभी उसकी नजर अपने बराबर वाले बेड पर पड़ी जिस पर वो चेक की शर्ट वाला लड़का जो सुबह दिखा था , उम्रदराज महिला के पैर दबा रहा था ,
और इतने में उसने भी देख लिया कि रेखा उसे देख रही है , रेखा ने हड़बड़ा कर नजर बचा ली अब और कुछ देखने की हिम्मत नहीं हुई तो आँखे बंद कर सोने की कोशिश की जो सफल भी हो गई |
सुबह करीब पांच बजे से ही चहलकदमी शुरू हो गई तो रेखा की आँख खुल गई माँ की तरफ देखा तो वो नहीं थी ,सोचा बाथरूम गई होंगी फिर पास वाले बेड की तरफ देखा तो वो चेक शर्ट वाला लड़का महिला के पैरों पर सर रखे ही सो गया था शायद देर रात तक पैर दबाता रहा होगा |

अब रेखा को माँ सहारा देकर बाथरूम लेकर गई और फ्रेश होकर रेखा बापस आ रही थी की तभी  पतले गलियारे से गुजरते हुए किसी से उसका कन्धा लग गया तो वो इस बात पर बिना देखे बिफर पड़ी और बोली " लोगो को अस्पताल में भी चलना नहीं आता बस मुंह उठाये जानवर की तरह दौड़ लगा दी |" इतना कह कर माँ ने उसको चुप रहने का इशारा किया तो चुप तो हो गई पर गुस्सा शांत नहीं हुआ और ऐसे ही धीरे धीरे चलकर बैड तक पहुँच कर बैठ गई  | 

मूड तो रेखा का पहले ही अस्पताल के शोर ने ख़राब कर दिया था जो ठीक से नींद नहीं आई और ऊपर से सुबह ही सुबह ये सब  | माँ ने चाय देते हुए कहा " क्या हुआ इतनी सी बात से मुँह सिकोड़ लिया यहाँ कोई भी मजे के लिए नहीं आया सब को यहाँ से जाने की जल्दी है "

तब तक पास वाले बैड पर एक वार्डबॉय ने लेटी महिला से पुछा " क्यों ताई कैसा हाल है ये जीवन इतनी हड़बड़ी में कहाँ गया "

" अरे कुछ नहीं ये उसका रोज का है मैंने जरा सा मजाक क्या दिया की तू तो  पैरो में लेटे ऐसे सो रहा है जैसे मैं मर गई हूँ , तो तुनक कर भाग गया " माँ ने मुस्कुराते हुए वार्डबॉय को देखकर कहा  |

"हा हा हा अभी भी बच्चा ही है ये, जब साथ पढ़ता था तब भी इसको मनाना पड़ता था " बार्डबॉय ने चाय का कप महिला की ओर बढ़ाया और कहा " मैं  समझाता हु उसे आप चाय पियो तब तक " 

ये कह कर जा ही रहा था की जीवन लौट आया  | लगता था जैसे रो कर आया है पर बार्ड बॉय को वहां देख कर पूछने लगा " क्या हुआ यहाँ "

बार्डबॉय बोला " तुझे दौड़ कर जाते देखा तो लगा जैसे कुछ गड़बड़ है इसलिए ताई से मिलने आ गया....और यहाँ तो पता लगा जीवन अपनी ताई को अकेला इस हाल में छोड़ कर भाग गए हा हा हा "

जीवन बात का मतलब समझते हुए उससे नजर बचाते  हुए दवाइओं में से सुबह खाली पेट लेने वाली दवाई

को ताई  को देते हुए बोला " कुछ नहीं यार बस मुँह धोने गया था " 

  इस पर बार्डबॉय उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला " यार जीवन ताई ने मुझे सब बता दिया तेरा बचपना कब जायेगा "

जीवन ने महिला की तरफ देखते हुए चेहरा सख्त हो गया और बार्डबॉय से बोला " मेरा ताई के अलावा इस दुनिया में है ही कौन और ये भी ऐसी बातें कर के मेरा खून जलाती है कभी कभी तो लगता है कि  कही जा के मर ... "

इतना कहते कहते पलकों पर दो आंसू के मोती आ गए जो जीवन चेहरा पीछे करके पोंछ कर खुद को संयत करने लगा।          

 माहौल को ठीक करने को मुस्कुराते हुए बार्डबॉय बोला " यार जीवन तूने कसम खा रखी है की तू रूठे और हम तुझे मनाये ताई ने तो सिर्फ मजाक किया था "

जीवन भी खुद को सामान्य करते हुए मुस्कुराने लगा  और बोला " चल ठीक है, अच्छा ये डॉक्टर कितने बजे आएँगी आज "

वार्डबॉय बोला " मै चलता हु थोड़ी देर में पूँछ कर बता दूंगा "

रेखा और उसकी माँ अभी भी उस तरफ ही देख कर कुछ समझने की कोशिश कर रही थी की तभी उस ताई ने रेखा की माँ से मुखातिब होकर कहा " बहनजी ये लड़का शरीर से बड़ा हो गया है पर दिमाग से बच्चे का बच्चा ही रह गया इसे कौन समझाए की जो आया है उसे तो एक दिन जाना ही है  "

रेखा की माँ ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा " नहीं बहन जी हम जिन्हे प्यार करते है उनके दूर जाने की बात से डर जाते है..., मुझे तो लगता आपसे ये लड़का बहुत प्यार करता है  "

"हां शायद सही कहा आपने उस बेचारे को कभी माँ  बाप का साया भी नसीब नहीं हुआ मेरे इन्ही हाथों में पला है और अब मेरे भी शरीर में दम नहीं की इसका कुछ ख्याल रख सकूँ " कहते कहते उदास होकर महिला ने पुरानी यादों को मन में कुरेदना शुरू कर दिया और यादों में खो गई। 

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जीवन एक सुलझा हुआ लेकिन किस्मत का मारा लड़का है । पैदा होते ही माँ बाप दोनों का स्वर्गवास एक बीमारी से हो गया फिर जीवन का घर कर्जे में चला गया अब सिर्फ खेत ही थे जो व्यक्ति उन्हें जोत रहा था वो उसे अपने घर ले गया करीब पंद्रह दिन बाद एक आदमी आया जो जीवन के पिता के बारे में पूछ रहा था तो गांव वालों ने उससे  उसके बारे में पुछा तो वो बोला मैं जीवन का ताऊ हु पर मैं बहुत ही दूर था इसलिए आ न सका अब मुझे जीवन के परिवार के बारे में बताओ। गांव वालों ने सब कुछ बता दिया तो वो कहने लगा मैं जीवन से मिलना चाहता हु तो उसे जीवन से मिलवा दिया गया तो वो बोला मैं इसे अपने साथ ले जाना चाहता हु मेरे भाई  निशानी को अब मै पालूंगा और बड़ा आदमी बनाऊंगा। कुछ लोगों को लगा ये सही कह रहा इस बच्चे को कोई अपना मिल जायेगा तो फिर उसके सींग उगने शुरू हुए और उसने पुछा की  घर खेत और घर के सामान का क्या हुआ वो भी उसे चाहिए तो गांव के प्रधान को शक हो गया तो भी उसने कहा "ये घर तो कर्जे की भेंट चढ़ गया और घर में सामान के नाम पर सिर्फ कुछ चम्मच कटोरी है बस खेत बचे है जो गांव का ही एक आदमी जोत रहा है"

 जीवन का ताऊ बोला मै सब कुछ बेंच कर इसे ले जाना चाहूंगा तो प्रधान ने उसे कहा "देखो भाई मै उस मासूम के जीवन की खातिर अभी तो कुछ बेंचने नहीं दूंगा पर हाँ अगर इसके समझदार होने तक पाल सको तो मै खुद ही खेत खरीद लूँगा "

अब तो जीवन के ताऊ का मुँह उतर गया पर तभी जीवन के खेत जोतने वाला बोला "प्रधान जी मुझे लगता ये सज्जन कुछ परेशान लगते  है" इतने में वहां का थानेदार आ गया बोला "क्या बात है प्रधान जी क्या हुआ यहाँ भीड़ कैसी है "

तो प्रधान ने सारी बात थानेदार को बताई तो थानेदार ने भी जरा कड़ककर कहा "हां भाई ले जाओ इस बच्चे को पर हर महीने इसे दिखाने  लाना होगा वार्ना तुम तो सब बेंच बांच के बच्चे को फ़ेंक के  गायब हो जाओगे।"

  इतना सुनते ही जीवन के ताऊ के  हाथ पैर  फूल गए क्यूंकि एक दिन पहले ही तो वो जेल से छूटा था और पता चला की उसका भाई मर गया अब जायदाद को बेंच कर कुछ दारू का इंतजाम करने का सोच कर आया था तो यहा तो दांव उल्टा पड़ गया। 

आखिरकार उसने कहा "मै  मेहनत  मजदूरी वाला आदमी इस बच्चे को कैसे पाल पाउँगा अगर कुछ मदद नहीं मिली तो"

बात प्रधान को जच गई तो बोला "ठीक है तो ऐसा करते है की इसके खेतों की कीमत 18 हिस्से कर देते है और हर साल इसके जन्मदिन  पर मै खुद आकर तुम्हे दे जाया करूँगा अब ठीक है"

सुनकर जीवन का ताऊ कुछ सोच रहा था तब तक थानेदार बोला "चलो उठो जीवन को लेकर मेरी गाड़ी में बैठो" इतना सुनकर जीवन का ताऊ सहम कर कुछ बोल न सका और जाने लगा तो प्रधान ने कहा "ये लो तुम्हारी पहली क़िस्त इसमें डेढ़ लाख रूपए है और जीवन को देखने मैं आता रहूँगा पता मुझे दे जाओ"

 अब तो जीवन का ताऊ क्या करता पता देकर गाड़ी में बैठ कर किस्मत को रोने लगा पर सोचा कोई बात नहीं ये डेढ़ लाख भी कोई कम रकम नहीं है।  

कुछ देर में ही घर  पहुँच कर थानेदार से बोला आइये घर में चलिए थानेदार से अपनी पत्नी को मिलवाया पत्नी ने   सोचा फिर कोई झमेला कर आया जो पुलिस के साथ में है

 जीवन का ताऊ बोला  " कुछ चाय पानी लेंगे साहब "

थानेदार बोला " नहीं , यहाँ कौन कौन रहता है "

जीवन का ताऊ बोला " बस मै  और मेरी बीबी "

" और तुम काम क्या करते हो " थानेदार ने घर देखते हुए कहा 

जीवन की ताई गुस्से में तपाक  से बोली " कुछ नहीं बस दारू झगड़ा और जेल "

इतना सुनते ही थानेदार चौंका इधर जीवन का ताऊ जीवन को खाट पर लिटा कर आया और ताई  के गाल पर एक थप्पड़ रसीद दिया 

ये देखते ही थानेदार का जोरदार चाटा लगा ताऊ को कि बत्तीसी हिल गई और थानेदार ने पिस्तौल निकाल कर ताऊ के कनपटी पर लगा दी और बोला " अगर आज के बाद मैंने ये हाथ किसी औरत या बच्चे पर चलता देखा तो तेरा भेजा उडा दूंगा चल भाग यहाँ से  और ये पैसे इधर ला "

तब तक जीवन जो इस धमाचौकड़ी से जाग गया और रोने लगा। ताई  से रुका नहीं गया और जीवन को उठा कर चुपाने लगी। जीवन कुछ देर में फिर सो गया। 

तब थानेदार ने ताई  को गांव की पूरी बात बताई तो उनकी आँखों में आंसू आ गए और माथे पर चूमती हुई जीवन का चेहरा निहारने लगी और बोली " बिलकुल अपनी माँ पर गया है "

थानेदार ने कहा " देखिये अब इसका कोई नहीं है आपको ही इसे पालना होगा "

ताई बोली " जब तक मै  जिन्दा हु इसके प्यार में कोई कमी नहीं रहने दूंगी वैसे भी इसी ने तो मेरी सूनी गोद भर दी वार्ना तो मैं किसके लिए जी रही थी मुझे खुद नहीं पता "

थानेदार बोला " जब तुम्हारा आदमी जेल चला जाता है तो घर कैसे चलाती हो "

ताई ने कहा " पेट भरने को कुछ घरों में चूल्हा चौका कर लेती हु "

थानेदार बोला " अब ये सब करने की जरूरत नहीं लो ये डेढ़  लाख रुपए है जीवन के खेत की कीमत का हिस्सा है अगले 18 साल तक ऐसे ही मिलते रहेंगे "

ताई ने कहा " अगर ये पैसे ले भी लिए तो वो दुष्ट मुझसे छीन  कर ले जाएगा और दारु में उडा देगा "

थानेदार ने  सोचते हुए कहा " ठीक है तो तुम एक किराने की दुकान खोल लो इस तरह कुछ कमा भी पाओगी और  जीवन का ख्याल भी रख पाओगी "

ताई को लगा बात  तो सही है पर कुछ सोचते हुए बोली " पर मै तो दुकान के बारे में जानती नहीं फिर .."

"मै किसी को भेज दूंगा जो तुम्हे बता देगा कहा से सामान खरीदना है "थानेदार ने कहा और ये मेरा मोबाइल नंबर रखो कभी कोई जरूरत हो तो फोन  कर लेना और हाँ ये 5000 रखो कुछ कपडे इसके और एक छोटा मोबाइल  ले लेना बाकी पैसे जरूरत पर मेरे घर से ले लिया करना अब चलो तुम्हे मै घर दिखा देता हु "

ताई को जैसे बिन मांगी मुराद मिल गई हो। ताई को जीवन का मासूम चेहरा देखकर फिर आंसू  आए और उसे  प्यार से चूमते हुए बोली " ये जीवन क्या आया मुझे फिर से नया जीवन मिल गया "

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इधर वर्तमान में जीवन माँ के लिए खाना लेकर आया था और प्लेट में परोस कर ताई को दे रहा था  ताई तो जैसे पुरानी  यादों की धूप छाव में ऐसी बैठी थी की सुन नहीं रही थी तो जीवन ने ताई पर हाथ रख कर हिलाया तो उसे देख कर मुस्कुरा उठी और जीवन के चेहरे पर प्यार से हाथ फेरती बोली " तू  नहीं होता तो मै किसके लिए जीती "

जीवन भी मुस्कुरा उठा और बोला " अरे ताई  ये बोल की तुम नहीं होती तो मै  भी  कहाँ होता "

ये कहते हुए प्लेट ताई के हाथ में दे दी और खुद सेब छीलने लगा इतने में डॉक्टर भी कमरे में  तो जीवन पीछे हट गया और डाक्टर नंदिनी की प्यारी आवाज से ताई मुस्कुरा दी 

डाक्टर ने नब्ज देखते बोला " और बताइये आंटी कैसे हाल है अब रात बुखार तो नहीं आया "

ताई तो जैसे उसके इन्तजार में ही थी बोली " बेटा बस अब मै ठीक हो गई अब इन दवाइयों को मत देना मुझे इन से उलटी आती है "

डॉक्टर मुस्कुराई और बोली " ठीक है आंटी दवाई नहीं तो इंजेक्सन ही सही शऱीर में दवा तो पहुचानी पड़ेगी "

ताई  इंजेक्सन की बात सुन कर घबड़ाते हुए बोली " अब तू कहती है तो मै दवाई ही खा लुंगी "

ये सुनकर सभी मुस्कुराने लगे और डॉक्टर अगली बैड पर रेखा को देखने पहुंची और बोली " अपने पैर की उँगलियाँ चलाओ "

रेखा ने कसमसाते हुए उँगलियाँ चलाई तो डॉक्टर बोली " ठीक है दर्द ज्यादा तो नहीं "

रेखा ने कहा "नहीं पर ..."

डॉक्टर बोली " पर क्या "

बीच में रेखा की माँ ने कहा " बस दिन भर नींद आती रहती है दवाई से  इसको "

डॉक्टर वार्ड बॉय को इशारे से परचा दिखाती हुई बोली " वो कल दर्द ज्यादा था इसलिए ये गोली दी थी अब दर्द काम हो गया तो इसकी कोई जरुरत ही नहीं "

ये कहते डॉक्टर आगे बढ़ गई। 

फिर माँ ने रेखा से कहा " मै घर होकर आती हु तू आराम कर "

रेखा ने कहा " अब तो आराम ही आराम है पर तुम जल्दी आना "

रेखा फिर लेटे बोर होने लगी अब तो नींद भी नहीं आ रही थी तो  इधर उधर देखने लगी और नज़र फिर  जीवन पर चली गई 

देखा  तो वो सेब  छील चुका था और  काट कर कटोरी में रख रहा था 

जीवन फिर ताई को सेब देकर बाहर चला गया और कुछ  बाद एक बिस्किट और एक न्यूज़ पेपर लेकर लौटा और तब तक रेखा अपने ही गुमसुम सर पर हाथ रखे लेटी  थी। 

रेखा के पास वाली बेंच पर बैठ गया और कुछ बोलने जा ही रहा था की रेखा हाथ हटा कर उसे घूर कर देखने लगी 

वो घबड़ाते हुए रेखा से बोला  " मुझे माफ़ कर दीजिये "

रेखा ने चौंकते हुए फिर देखा तो जीवन बोला " सुबह मैं आपसे टकरा गया था इसलिए "

रेखा ने कहा " ठीक है कोई बात नही "

जीवन ने फिर कुछ सोचते हुए कहा "तो आपने मुझे माफ़ कर दिया "

रेखा अभी भी बात खत्म करने की जल्दी में बोली" हा कर दिया"

तो जीवन ने बिस्किट का पैकेट बढ़ाते हुए मुस्कुराते हुए कहा " तो इसी बात पर मीठा हो जाये"

रेखा मुस्कुराना चाहती थी पर वैसे ही सख्ती से बोली "नही मुझे नही चाहिए "

जीवन बोला "तो लगता है आपने माफ नही किया "

रेखा को अब गुस्सा आने लगा और बोली" देखिए मुझे ये नही चाहिए और आप जाइये "

जीवन अब समझ गया और अखबार और बिस्किट रखते हुए बोला " देखिए मैं कोई आपको परेशान करने नही आया बस आपको परेशान होते देख आया हु यहाँ अस्पताल में वक़्त कटता नहीं काटना पड़ता है इसलिए ये अखबार और ये बिस्किट रख रहा हु बाकी आपकी मर्जी"

और उदास मन से अपनी बेंच पर जाकर बैठ गया और एक डायरी में कुछ लिखने लगा।

रेखा को समझ नही आ रहा था कि क्या करे तो वैसे ही लेटी रही और कुछ देर के बाद उसको लगा जैसे चक्कर आ रहा है और उल्टी सी आने लगी ।

जैसे ही जीवन को ये आभास हुआ तो वो जल्दी से आया और कूड़ेदान को बैड के नीचे से बाहर की तरफ सरका दिया जिससे वो उल्टी उसी में कर पाई और एक दो बार मे ही उसे लगा अब कुछ ठीक लग रहा है तो जीवन ने उसे पानी दिया और कूड़ेदान को अंदर सरकाकर बाहर चला गया और एक गोली लाया और रेखा को दी और बोला इसे खा लीजिये आराम मिल जाएगा ।

रेखा ने गोली ले कर खा ली फिर वैसे ही सिर पर हाथ रख कर लेट गई।

थोड़ीदेर में जीवन फिर पूछने आया "अब दोबारा तो नही आ रही "

रेखा ने सिर को ना में हिलाया

जीवन ने कहा" पेट मे जो था वो तो निकल गया अब दवाई खाने से पहले बिस्किट खा लेना "

पता नही क्यों पर रेखा कुछ देर तक जीवन को जाते हुए देखती रही फिर मुस्कुराने लगी

जीवन बापस आया तो देखा रेखा एक करबट से लेटे लेटे अखबार के पन्ने पलट कर देख रही है तो जीवन ये देखकर मुस्कुरा उठा और रेखा की नजर पड़ते ही वो झेप गई और अपने मुंह अखबार के पीछे छुपा लिया ।

जीवन अब ताई को जगाया और बोला "ताई उठो ये दवाई खा लो फिर सो जाना "

ताई ने दवाई खाई और फिर लेट गई।

अब जीवन बैठ कर फिर डायरी में कुछ लिखने लगा तब तक रेखा की माँ आ गई ।

और रेखा से बोली " दर्द तो नही हो रहा अब"

रेखा ने अखबार किनारे करते बोला" मिल गई फुरसत आज आपकी लड़की तो गुजर ही गई थी "

रेखा की माँ ने चौकते हुए कहा " क्यों क्या हुआ "

"मुझे चक्कर और फिर उल्टी आई थी लगा जैसे मैं मर ही जाउंगी" रेखा कह कर मा का चेहरा ध्यान से देखने लगी जिस पर बेटी के लिए चिंता की रेखाएं आ गई थी 

माँ बोली " फिर "

रेखा धीमे स्वर में बोली " फिर उन्होंने मुझे पानी दिया और एक गोली लेकर दी तब जाकर कुछ चक्कर कम हुए "

रेखा के उन्होंने के इशारे को देखकर कर मा ने रेखा के साथ पीछे मुड़ कर देखा तो जीवन अभी भी कुछ डायरी में लिख रहा था ।

माँ ने रेखा से कहा " जरूर इन दवाइयों से गर्मी हो गई हो गई ये तो अच्छा है कि आज खाना भी मैं सादा ही लाई हु चल हाथ धो कर खा ले"

रेखा ने कहा" ठीक है °

रेखा ने  खाना खाते हुए एक दो बार जीवन को देखा तो वो उसे खाते देख मुस्कुरा रहा था तो फिर रेखा ने भी मुस्कुरा कर देखा और खाना खाने लगी

अब जीवन रेखा की तरफ आया और रेखा की माँ से बोला "आंटी आज रात के खाने को थोड़ा हल्का ही रखियेगा नर्स बोल रही थी जिससे इसके लिए गोली लेने गया था"

रेखा की माँ ने जीवन की तरफ देखकर कहा " हाँ बेटा ध्यान रखूंगी पर जो तुमने किया उसके लिए बहुत शुक्रिया "

जीवन मुस्कुराते हुए बोला " मुझे शुक्रिया नही माफी दिला दीजिये सुबह जानवरो की तरह टकरा जाने के लिए "

रेखा ये बात सुनकर झेंप जाती  है

रेखा की माँ ने रेखा को देखते हुए बोली " बेटा अब तो माफ करदे "

तो रेखा बोली "मैंने इन्हें पहले ही माफ कर दिया"

"इस जीवन का जीवन सफल हो गया " कहते कहते खिलखिलाने लगा तो रेखा और उसकी माँ भी हँसने लगी ।

इस हसी को सुनकर अभी नींद से उठी ताई को समझ नही आया तो बोली "जीवन क्या हुआ"

जीवन बोला"अरे ताई आप चूक गए अभी यहां प्रभु साक्षात आये और बोले बच्चा तुझे माफ किया"

ताई अभी भी असमंजस में बोली " किस लिए "

जीवन बोला" सुबह मेरी अच्छी ताई को अकेला छोड़कर जाने के लिए"

ताई अब उसकी मजाक को समझ कर मुस्कुराने लगी जीवन आगे कहने लगा " ताई वो कह रहे थे तुम्हारी ताई अब सौ साल और जियेंगी, यकीन ना  आये तो इन मौसी से पूछ लो।"

ताई ये सुन कर जीवन से साथ खिलखिलाने लगी और उधर अपने लिए मौसी सुनकर रेखा की माँ भी भावना से भर गई ।

रेखा की माँ बोली " हा बहन जी जीवन सच कह रहा है "

रेखा को अभी भी यकीन नही हो रहा था कि उसकी माँ एक अनजान की बातों पर इतना खिलखिला रही थी 

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