Thursday, May 27, 2021

सूरज पर ग्रहण भाग प्रथम

सूरज कहने को तो बड़ा शांत लड़का था पर आज किसी अपने को इस हालत में देख कर खुद को  चीखने से रोक नहीं पाया | दरअसल उसकी बहन निशा सीढ़ी से गिरकर बेहोश हो चुकी थी |
और  वो हाथो में उसे उठा कर दरवाजे की तरफ दौड़ा जा रहा था की तभी पीछे से उसकी बुआ की गरजती हुई आवाज आई "क्या कर दिया तूने निशा को "
उसने चलते चलते कहा " ये गिर कर बेहोश हो गई "
इतना सुनते ही मानो निर्मला देवी का गुस्सा तो आसमान छूने लगा और तेज क़दमों से आकर सूरज की पीठ पर दो बजनदार घूसे लगाये |

निर्मला देवी ने चीखते हुए कहा " क्यों रे जब तक हम दोनों को भी नहीं खायेगा चेन से नहीं बैठेगा जैसे लाला जी को खा गया, जरूर तूने ही धक्का दिया होगा देखो तो कितना खून निकल रहा है, पड़ गई तेरे कलेजे को ठंडक , तू उसी सड़क पर मर क्यों नहीं गया जहाँ से तुझे लाला जी तुझे उठा के लाये थे ",
अब कोई भी आवाज सूरज के कानों तक नहीं पहुँच रही थी उसे बस निशा की उस चोट की फिक्र थी जो उसके सर में लगी थी उसने बहुत कोशिश की निशा की बेहोशी टूटी नहीं तो फिर वह निशा को उठा कर बाहर रिक्शे की तरफ बढ़ने लगा इस पर बुआ ने उसकी शर्ट पकड़ कर कहा "तुझ जैसे मनहूस की तो परछाई भी अब निशा पर नहीं .."
इतना ही निर्मला कह पाई कि सूरज की लाल आँखे और रोइ सी आवाज ने उन्हें चुप हो जाने पर मजबूर कर दिया, सूरज बोला"बुआ जी बस मुझे अस्पताल जाने दो फिर जो चाहे कह लेना |"
और इतना सुनने पर निर्मला ने सूरज की शर्ट को छोड़ दिया |

 
आज अस्पताल में सूरज का दूसरा दिन था, निशा सो रही थी और निर्मला निशा के सर पर  हाथ फेर रही थी और सूरज डॉक्टर को रिपोर्ट दिखा रहा था | चैक अप होने और सारी रिपोर्ट् देखने के बाद डॉक्टर ने सूरज की तरफ देखकर कहा," तुम्हारी बहन बड़ी किस्मत बाली है कोई बड़ा फ़ैक्चर नहीं हुआ , सारी रिपोर्ट नार्मल है, अब हम इसे नार्मल वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं कल इसे डिस्चार्ज करा लेना |
डॉक्टर के जाने के बाद पास खड़ी नर्स मेनन ने दवाइयाँ निकालते हुए कहा " सच में इस लड़की की किस्मत बहुत अच्छी है वरना इतना फिक्र करने वाला भाई कहाँ मिलता है, अब तो जाकर थोड़ी देर सो लो सूरज वर्ना ये ठीक हो जायेगी और तुम बीमार हो जाओगे " इतना कह कर मुस्कुराने लगी |
अगले दिन निशा को घर लाया गया और सूरज ने जैसे ही निशा को बिस्तर पर लेटाया, निशा बोली" सॉरी भैया मेरी गलती थी और डाँट आपको लगी "
" अरे नहीं पगली कोई बात नहीं ये तो तेरे लिए उनका प्यार था "सूरज ने उसके लटके हुए निशा केे पैर बिस्तर पर रखते हुए कहा |
"नहीं भैया मैं हमेशा से मां का व्यवहार देखती आई हूँ उन्होंने जरूर तुम्हे खूब खरी खोटी सुनाई होगी मुझे पता है" इतना कहना था सूरज ने अपने होंटों पर ऊँगली के इशारे से निशा को मुस्कुराते हुए चुप रहने का इशारा किया और बोला"अब बात नहीं बाक़ी बातें कल होंगी सो जाओ"

इतना कहते हुए निशा बोली " मैं सो जाउंगी पर आप बादा करो जबतक मैं सो नही जाती आप यही बैठोगे "

इतना कहकर सूरज की गोद मे सिर रख कर लेट गई सूरज भी प्यार से उसके  सर पर हाथ फिराने लगा और 

धीरे धीरे निशा नींद की आगोश में चली गई।

रात भर की अपने बिस्तर की नींद ने निशा की चेहरे की रौनक लौटा दी थी जिसे देख कर सूरज भी खुशी खुशी काम पर जाने को तैयार था पर अभी लगता है कि सूरज पर लगा ग्रहण हटा नही था । 

पिछले दो दिन से सूरज दुकान पर खुद नही जा पाया था और इसी कारण दुकान पर काम करने वाले लड़के अमर और रंजीत ही दुकान का काम संभाल रहे थे ।

करीब 11 बजे निर्मला देवी जब गल्ले पर आकर बैठी तो पता चला तिजोरी से 2000 का एक नोट कम है निर्मला देवी तो कई दिन से इस बात शक था कि सूरज पैसे की चोरी कर रहा है आज यकीन हो गया । इसी शक की बजह से ही तो निर्मला देवी ने नोटों को गिन कर रखा था । अब तो उन्होंने आब न देखा ताव सूरज को बुला कर दो झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद दिए । सूरज के आंसू निकल आये पर फिर भी निर्मला की तरफ प्रश्नवाचक निगाह डाली तो निर्मला ने गला फाड़ कर चीखना शुरू किया और बोली"हाय हाय ये लड़का तो हमे जब तक सड़क पर नही ले आएगा नही रुकेगा अभी हजारो रुपये का अस्पताल का खर्चा कराया और अब चोरी पर उतर आया  तू ऐसा निकलेगा मैं जानती थी कितनी बार कहा इस नाली के कीड़े को वही सड़ने दो लाला जी नही माने ..हाय हाय खुद तो चले गए इस करमजले को भी साथ  ले जाते " 

इतना सुनकर आस पास के दुकानदार और ग्राहक भी ये सब देख कर माजरा समझने की कोशिश करने लगे तभी एक महिला अंदर आई और बोली "क्या हुआ बहन जी "

निर्मला देवी ने कहा " देखो ना मैंने जरा सा अपनी लड़की के इलाज पर ध्यान देना क्या शुरू किया ये लड़का तो चोरी पर उतर आया"

महिला बोली" ऐसे चोरों को तो पुलिस के हवाले कर देना चाहिए रुकिए अभी बुलाती हु "

निर्मला देवी को तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई हो जोर देते हुए निर्मला ने कहा " हाँ बुलाइये वही उगलवाएँगे इसके मुँह से "

इतना सुनते एक आदमी अंदर आया और बोला " क्या हुआ मैडम "

इतना सुनते ही वो महिला आदमी को देखकर मुस्कुराने लगी बोली " देखिए ना हबलदार साहब ये मासूम सा लड़का जो सुबक रहा है कितना डीठ है कि चोरी के बारे में इतना पिट के भी कुछ नही बोल रहा है "

हवलदार बोला" अच्छा , ओये बता कहा गया नोट बरना थाने ले जाकर इतने बेंत मारूंगा की पिछले जन्म का भी याद आ जायेगा"

सूरज जो कोने में खड़ा सुबक रहा था कि कैसे समझाए की चोरी उसने नही की ।

हवलदार ने सूरज की कॉलर को खींचते हुए कहा " चल जब तेरी मर्जी और ठुकाई की है तो मैं भी क्या कर सकता हु अच्छा मैडम इसे ले जा रहा हु इसकी बोलती खुलते ही बताऊंगा"

"अरे रुकिए इसका झाड़ा तो ले लीजिए हवलदार जी" महिला ने सूरज का हाथ पकड़ कर रोकते हुए कहा

हवलदार को बात सही लगी और उसने सूरज का झाड़ा लेते हुए एक 2000 का मुड़ा हुआ नोट निकाल कर निर्मला को दिखाया तो निर्मला चौंक उठी "हॉ यही है यही तो है " और नोट को लेकर तुरंत गल्ले में डाल दिया

"बहुत बहुत शुक्रिया हवलदार जी " निर्मला ने हंसते हुए कहा

हवलदार ने भी हंसते हुए कहा " इस शुक्रिया से क्या होगा देना है तो एक 2 किलो अरहर की दाल दे दीजिए हे हे हे"

निर्मला समझ गई आज तो ये हवलदार उसका 300 का चूना लगा कर जाएगा तो बोली" अरे अमर जरा 2 किलो बढ़िया वाली अरहर की दाल तो ले आ "

महिला ने हवलदार से कहा "अरे हवलदार जी इस लड़के को तो रंगे हाथ पकड़ लिया फिर भी छोड़ रहे हो जरा कुछ दिन जेल में डालो वरना फिर से बड़ी चोरी करेगा"

हवलदार ने हामी भरते हुए कहा" सही कहा मैडम आपने ये साले इस उम्र में चोरी सीख गए तो बड़े होकर डाके डालेंगे इसे तो दिन नही महीने भर जेल में डालूंगा"

इतने में अमर दाल ले आया जिसे लेकर हवलदार एक हाथ मे दाल और दूसरे से सूरज का कॉलर पकड़ कर ले गया ।

 ये देखकर निर्मला ने चैन की सांस ली और महिला से बोली "बहनजी आपने तो कमाल कर दिया इतनी जल्दी तो करमचंद जासूस भी नही ढूंढ पाते ही ही ही "

महिला बोली " हा बहन जी मेरा दिमाग बहुत तेज चलता है उसी के लिए तो बादाम आधा किलो दे दीजिए"

महिला पैसे दिए और बादाम लेकर बोली " चलिए आपकी उस चोर लड़के से जान छुटी अब इन लड़को को जरा दबा कर रखियेगा"

निर्मला देवी बोली " हा बहनजी मैं तो उस सूरज के बच्चे को जन्म से ही जानती हूं बड़ा दुस्ट है अच्छा हुआ अब तो मैं गंगा नहाई वो इतने साल लाला जी की बजह से बर्दास्त कर रही थी वार्ना तो कबका धक्के मार के निकाल दिया होता ।

महिला ने कहा " अच्छा ठीक है फिर मैं चलती हु"

इतना कहकर महिला ने अपनी स्कूटी उठाई और आगे बढ़ गई थोड़ी देर बाद थाने के बाहर खड़े सूरज और हवलदार के पास जाकर रुकती है । सूरज अभी भी उस चोरी वाले दुःस्वप्न में खड़ा हवलदार के पास सिर झुकाए खड़ा था । कि तभी महिला की आवाज से चौंक जाता है महिला मुस्कुराकर हवलदार से कहती है "शुक्रिया आपने मेरी बहुत मदद की " इस पर हवलदार कहता है "इसमें शुक्रिया कैसा मैंने तो बस अपना फर्ज निभाकर इस मासूम को उस जालिम से बचाने में आपकी मदद की है और मुझे तो मेरा इनाम भी 2किलो दाल के रूप में मिल चुका हा हा हा"

महिला हंसते हुए कहती है "जी हवलदार जी सही कहा कर भला तो हो भला"

इतना सुनकर हवालदार सूरज को वहाँ छोड़कर थाने में अंदर चला जाता है और सूरज उसे पीछे से देखता रहता है कि शायद वो लौट कर फिर उसे थाने ले जाने आएगा

पर तभी सूरज को देखते हुए महिला बोली "चलो सूरज पीछे बैठो"

सूरज वही जड़वत खड़ा अचम्भे से महिला को देख रहा था।अभी तक जो हुआ वो उसके साधारण मन के परे था

महिला ने सूरज की हालत समझते हुए कहा " देख सूरज मैं तुझे घर चलकर सब बताती हु अभी बस इतना समझ की आज से तू अकेला नही अब तेरी दीदी तेरे साथ है चल अब स्कूटी पर बैठ तुझे तेरा नया घर दिखाती हु "

सूरज कुछ जिज्ञासा से फिर कहना चाहता है" पर दीदी ..."

इतना कहते महिला उसका हाथ थाम कर स्कूटी की तरफ कर देती है और सूरज स्कूटी पर बैठकर बिना कुछ बोले बस अपनी जिंदगी की उठापटक को देखकर मुस्कुराने लगता है मानो उसे अपने भविष्य में कुछ अच्छा होने की आशा की किरण दिख रही हो

                               क्रमशः

                           


No comments:

Post a Comment