Thursday, December 27, 2012

"जिन्दा प्यार"

"पता नहीं कहाँ  मर गयी मेरे पेट में चूहे कब्बडी खेल रहे है, ये साली रोज ही देर लगाती है रोटी बनाती है कि पैदा करती है " हरिया ने बडबडाते हुए पसीना पोछा और एक बार फिर गाँव कि ओर देखा इस बार धीरे धीरे चलती हुई धनिया आती दिखाई दी तो कुछ आराम मिला ।
धनिया ने खाना और पानी रखा तो हरिया बोला "कहाँ रह गयी थी यहाँ जान निकल रही थी "
"आज जल्दी में तवे से पैर लग गया और छाला पड़ गया" धनिया ने आह भरते हुए कहा तो टीस हरिया के दिल तक जा पहुंची। इतना सुनते ही भूख प्यास तो हरिया की मर ही चुकी थी क्यूंकि दुनिया में धनिया ही तो इकलौती थी जो हरिया का जिंदगी का एकमात्र सहारा थी। 
"ला दिखा , कुछ लगा लिया था .....पता नहीं तेरा आज कल ध्यान कहा रहता है " खाना एक तरफ रखते हुए हरिया ने कहा ।
"कुछ देर पानी में रखा था तभी तो देर हो गई " धनिया ने पैर पर पड़ा छाला 
दिखाते हुए कहा ।
छाला मोटा पड़ गया था तो हरिया बोला "आज न आती मै भूखा मर थोड़े ही जाता "
ये वही हरिया था जो थोड़ी देर पहले भूख से कुलबुलाता धनिया को गाली दे रहा था मगर अब उसकी आंखे बता रहीं थी जली धनिया है पर जलन हरिया के दिल पर हो रही है। 
धनिया ने हरिया के मुँह पर हाथ रखा और बोली "आपको भूखा रख कर मैं तो मर जाती "
इतना सुनकर हरिया मुस्कुराना चाहता था पर उसका धनिया के लिए प्यार उसे रोक रहा था तो वो दिल ही दिल में उसके लिए आंसू बहा रहा था। 
इतने में उसका ध्यान धनिया की दूसरे पैर के पास गया जो वो मेड के दूसरी तरफ फैला कर बैठी थी और अनजाने में मेड को पैर  के अंगूठे से कुरेद रही थी और मेड का कुछ हिस्सा गिरने के कारण काली पूँछ दिखाई दे रही थी जिसे दखकर अंदाजा लगाया जा सकता था की अंदर उस सांप की मोटाई किसी की कलाई से काम नहीं होगी हरिया कुछ दनिया से कह पाता  तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्यूंकि मेड की काफी मिटटी  खोखल होने के कारन ढह  गई और सांप का असली चेहरा सामने आ गया लगता की अगर ये किसी को डस ले तो वो परलोक सिधारने में ज्यादा देर नहीं लगा पायेगा धनिया अभी भी हरिया पर बिना ध्यान दिए अपने छाले को सहला रही थी हरी या ने चीख कर धनिया से कहा " धनिया पैर  हटा "
धनिया कुछ समझ पाती उससे पहले ही नाग अपना फन  उठा चूका था पर धनिया को ये धयान न होने से अभी भी उसने छाले वाला पैर भी मेड की तरफ कर दिया उस नाग को नागवार गुजरा। 
हरिया ने ध्यान 
से उस नाग को झपटने की कोशिश की क्यूंकि उसे पता था अगर कुछ पल ही इन्तजार धनिया के आखरी पल बन जाते और उसने झट से उसे दबोच कर दूर डालने को ले गया पर छोड़ने के लिए जैसे ही हाथ ढीला किया नाग ने डस लिया और हरिया वही लेटता चला गया ।
अब धनिया दौड़ कर हरिया के पास गयी और उसने देखा क़ी हरिया क़ी साँस नहीं चल रही है तो नाग क़ी तरफ हाथ बढाकर बोली "मुझे भी डस ले, अब मैं भी जी के क्या करूंगी "
तब नाग बोला "अब प्यार निभाने क़ी बारी तेरी है अब तू भी मर गयी तो हरिया के मरने का क्या फायेदा कौन उसके प्यार को याद रखेगा "
"प्यार में मरना नहीं प्यार के बिना जीना ही प्यार को इस दुनिया में जिन्दा रखता है "

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